Thursday, May 24, 2018

आक्सीरिच वृक्ष पीपल: आइये जानते है पीपल वृक्ष के बारे में कि हमारे जीवन में क्यो उपयोगी है हमे इन्हे क्यो बचाना चाहिये (संदीप कुमार मौर्य)

पीपल 
Image result for peepal tree role in envoirnmnet
जगत        : पादप 
विभाग :       सपुष्पक
वर्ग :       मैगनोलियोप्सीड़ा
गण :      रोजेलेश
कुल           :      मारेसी
प्रजाति :      फाईकस
जाति   :     फाईकस रेलीजियोसा


पीपल, गुलर या बरगद की जाति का एक विशालकाय वृक्ष है। जिसे भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। एव अनेक त्यौहारों व पर्वो पर इस वृक्ष की पूरे श्रृद्वाभाव से पूजा अर्चना कि जाति है। इस वृक्ष के बीज राई के दानो से भी छोटे आकार में होते है। बीजो का आकार इतना न्यून होने के कारण भी इसके बीज से उत्पन्न वृक्ष विशानकाय एवं बहुवर्षीय होते है। तथा कई वर्षो तक जीवित रहते है। इस वृक्ष के पत्ते देखने में सुन्दर चमकीले, तथा चंचल होते है इस वृक्ष के पत्तों व फलों का उपयोग जानवरों के चारे व पक्षियों के भोजन के रूप में आता है।
Related image
भारतीय संस्कृति में पीपल वृक्ष को देव वृक्ष या वृक्षों में सर्वश्रेष्ठ माना गाया है


पीपल वृक्ष की धार्मिक महत्वः-
भारतीय संस्कृति में पीपल वृक्ष को देव वृक्ष या वृक्षों में सर्वश्रेष्ठ माना गाया है। स्कन्द पुरान के अनुसार पीपल के मूल में भगवान विष्णुु, तने में केशव (कृष्ण), शाखाओं में नारायण का वास होता है। अर्थात पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु जी का मूर्तिमान स्वरूप  विराजमान है शास्त्रों के अनुसार पीपल वृक्ष की पूजा मात्र से समस्त देवताओं की पूजा हो जाती हैं। पीपल वृक्ष लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनिष्ट नही होती। पीपल वृक्ष की सेवा करने वाले सदैव सदगति को प्राप्त करते है। पीपल वृ़क्ष के नीचे साधना, उपासना, पूजा तथा सभी प्रकार के संस्कारो को शुभ माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भागवतगीता  (10/26) में कहते है। 

हे! अर्जुन, अश्रत्यः सर्ववृक्षाणाम् 
Image result for peepal ki pooja geeta updesh
अर्थात मै वृक्षों में पीपल वृक्ष हूॅ। पीपल ही बोधि वृक्ष है इसी वृक्ष के नीचे बैठकर तथागत भगवान गौतम बुद्व ने ज्ञान की प्राप्ति की थी।
Image result for bodhi tree

वैसे भी पीपल को वृक्षों का राजा कहते है। इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए-
मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,
सखा शंकरमेवच।
पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,
वृक्षराज नमस्तुते।

हमारे वातावरण में पीपल वृक्ष का महत्वः-
Image may contain: 1 person, standing, tree, plant, child, outdoor and nature
फाऊडेशन सयुक्त सचिव श्री सुनील नायक जी द्वारा पीपल वृक्षो का रोपड करते हुए
पीपल वृक्ष का हमारे वातावरण में विषेश महत्व है क्योंकि हमारी पृथ्वी पर पाया जाने वाला यही एक मात्र बहुवर्षीय वृक्ष है जो हमारे वातावरण में दिन-रात (व्2) आक्सीजन छोड़ता है जबकि इसके विपरीत अन्य वृक्ष केवल दिन में ही (व्2) आक्सीजन व रात में कार्बन-डाई-आक्साईड (ब्व्2) छोड़ते है पीपल वृक्ष में एक खास बजह यह भी है कि यह वृक्ष अपनी बनावट व पत्तो के आकार व प्रकार के कारण सूरज की तपती गरमी को तो रोक लेता है किन्तु सूरज की रोशनी को नही। इसलिऐ इस वृक्ष के नीचे छाया तो रहने के साथ-साथ उजाला भी रहती है।
Related image

Image result for peepal tree photosynthesis
देखने में आया है कि पिछले कई वर्षों से पीपल वृक्षों को सरकारी स्तर पर लगाना बंद कर दिया गया है। अतः इन वृक्षों की जगह अव यूकेलिप्टस, गुलमोहर, एवं अन्य साजावटी वृक्षो का लगवाना शुरू कर दिया है। जो कि किसी न किसी प्रकार से मानव सभ्यता व पर्यावरण में प्रतिकूल प्रभाव छोड़ रहे है। 
Image result for save tree save water drawing
पीपल वृक्षों की जड़े, भूमि में अधिक गहराई तक अर्थात पताल तक जाती है। इसी करण से ये वृक्ष भूमि में जल का स्तर को बनाये रखने में मद्दगार होतें है अतः दुसरे शब्दो में पृथ्वी पर जल के स्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए आधिक से अधिक पीपल के वृक्षों को लगवाना चाहिए।
Image may contain: 1 person, standing, tree, shoes, outdoor and nature
फाऊडेशन उपाध्यक्ष श्री राहुल अग्रवाल जी (सिंटी भैया) द्वारा पीपल वृक्षो का रोपड करते हुए

पीपल वृक्ष का हमारे जीवन में औषिधि महत्वः-

पीपल के वृक्ष के पत्ते, सूखे फल, जड़, पीपल के बीज, सभी कुछ स्वास्थ के लिये गुणकारी व लाभदायक हैः-
Image result for peepal tree role in envoirnmnet

👉दिल के रोगो में- दिल के कई प्रकार के रोगो से बचाने के लिये पीपल की हरी ताजी पत्तीयों को एक गिलास पाीनी में अच्छी तरह उबाले जब 1/3 भाग रह जाये तो सुबह में प्रतिदिन 3-3 घन्टे के अंतराल इसका सेवन करने से दिल के रोगो में फायेदेमंद साबित होता है।
Image result for heart disease
👉 सर्दी, खासी, एव जुकाम में- पीपल के पत्तो का चूर्ण, सर्दी, खासी, एव जुकाम के ईलाज के भी फायेदेमंद माना जाता है।

👉सांस की तकलीफ - सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में पीपल का पेड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें। सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर खाने से सांस संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा इसके पत्तों का दूध में उबालकर पीने से भी दमा में लाभ होता है। 
Image result for sardi khasi bukhar
👉 पीलिया - पीलिया हो जाने पर पीपल के 3-4 नए पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर बनाए गए शरबत को पीना बेहद फायदेमंद होता है। इसे 3-5 दिन तक दिन में दो बार देने से लाभ होता है।
Image result for jaundice symptoms
👉त्वचा रोग - त्वचा पर होने वाली समस्याओं जैसे दाद, खाज, खुजली में पीपल के कोमल पत्तों को खाने या इसका काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है। इसके अलावा फोड़े-फुंसी जैसी समस्या होने पर पीपल की छाल का घिसकर लगाने से फायदा होता है।
Related image
👉दांतों के लिए - पीपल की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं, और दांतों में दर्द की समस्या समाप्त हो जाती है। इसके अलावा 10 ग्राम पीपल की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च को बारीक पीसकर बनाए गए मंजन का प्रयोग करने से भी दांतों की सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
Image result for teeth diseases

👉
सांप काटने पर - सांप काटने पर अगर चिकित्सक उपलब्ध ना हो तो पीपल के पत्तों का रस 2-2 चम्मच ३-४ बार पिलायें। विष का प्रभाव कम होगा।


Image result for saap ke katne ke nishan
👉बाझपन एवं नपुसंकता में- पीपल के फलो का चूर्ण लेने से बाझपन व नपुसंकता दूर होता है। पीपल के पेड़ , जड़ व जटाओ में पुरूर्षोत्व प्रदान करने के गुण मौजूद होते है अतः इसके जड़ो, फलो, पत्तियों,  एव जटाओ से बने औषिधि का प्रयोग कर बाझपन व नपुसंकता के दोष को दूर किया जा सकता है इसके अलावा यदि कोई पुरूष संतान उत्पन्न असमर्थ है तो पीपल के पेड़ की जड़ो को काटकर उसका काढा पीने से भी लाभ मिलता है।
Image result for banjhpan ka ilajImage result for banjhpan ka ilaj




अतः इसी प्रकार इस वृक्ष में ऐसे कई असाध्य एवं लाईलाज बीमारीयों के रामबाण औषिधिय गुण मौजूद है।

Image result for peepal tree role in envoirnmnet



फाऊडेशन अध्यक्ष श्री संदीप कुमार मौर्य जी द्वारा पीपल व अन्य वृक्षो बचाने हेतु 
वृक्ष मित्र (Selfi With Tree) अभियान
 का अगाज किया गया ग्राम रैपुरा तालाब से----


‘‘कृपया ऐसे प्रकृति के 
अनमोल वृक्षों को बचायें’’
Image result for help or support and donate

Wednesday, May 23, 2018

पौधा रोपड़ हेतु दिशा निर्देश एवं सुझाव

पौधा रोपड़ हेतु संस्था के पदाधिकारियों, अधिकारियों, संरक्षक/सहयोगी सदस्यो हेतु पौधा रोपड़ के संबध में आवश्यक दिशा निर्देश एवं सुझावः-

अ). पौधे रोपड़ हेतु लगने वाले औजार :

गैती, फावड़ा, कुदाल, सम्बल, तगाड़ी, कुल्हाड़ी, सस्सी, बाल्टी, जग(मग्गा), धारदार चाकू, ब्लेड़।

                          ब). खेत की मिट्टी, गोबर की खाद आवश्कतानुसार।


पौधा रोपड़ हेतु दिशा निर्देशः-
👉 पौधा रोपड़ से पूर्व जहां पर पौधे का रोपड़ करना है वहाॅ गैती/कुदाल व संम्बल की सहायता से 2 फीट लम्बाई एवं 2 फीट चैडाई, 2 फीट गहराई का गड्डा बनाये।

👉 किये गये गड्डो में सर्वप्रथम 1/2 (आधा फीट) तक गोबर की खाद व खेत की मिट्टी डाले। तथा साथ ही कुछ कीटनाशक (गंधक) पाउडर भी डाले जिससे की पौधे की जड़ो पर दीमक एवं अन्य प्रकार की किणाओं का प्रकोप ना हो।

👉 इसके पश्चात पौधो को आहिस्तापूर्वक गड्डो के पास लाकर किसा धारदार चाकू/ब्लेड की सहायता से पौधे को पाॅलीथीन को सावधानी पूर्वक अलग करें।

👉 पाॅलीथीन से अलग किये गये पौधो को गड्डे के मध्य भाग में रखे। जिस गड्डे में 1/2 (आधा फीट) तक गोबर की खाद व खेत की मिट्टी डाली गयी हो।

👉 पौधो की रोपड़ के पश्चात पौधे के चारो तरफ मिट्टी एवं गड्डे की मिट्टी डालकर हल्के हाथो से सावधनीपूर्वक दबाए। ताकि लगाए गए पौधो की जड़े न हिले। 

👉 लगाए गये पौधो को सुरक्षा हेतु लकड़ी, तार, कांटो एव बजटनुसार पौधे का सुरक्षा कवच (ट्रीगार्ड) तैयार करे। 

👉 समय-समय पर पौधे को सीचे व आवश्कतानुसार उपचारित करें।


आक्सीरिच इनवायरमेंट वेलफेयर फाऊण्ंडेशन

नर्सरी गार्डेन (प्रास्तावित)

Image result for poly house images

पर्यावरण प्रदूषण क्या है ?

पर्यावरण प्रदूषण:
पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है पर्यावरण का विनाश। यानि की ऐसे माध्यम जिनके कारण हमारा पर्यावरण दूषित ता है। इसका प्रभाव से मनुष्य और प्राकृतिक दुनिया को ना भुगतना पड़े उससे पहले हमें इसके विषय में जानना और समझना होगा। आइये जानते है कि सर्वप्रर्थम पर्यावरण प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं


वायु प्रदुषणः 


वायु विभिन्न प्रकार के गैसों का निश्चित मिश्रण प्राणदायक वायु (जीवनदायक हवा) कहलाती है। जिसमें 78 प्रतिशत नाइट्रोजन सार्वाधिक व 21 प्रतिशत आक्सीजन तथा 0.03 प्रतिशत कार्बन डाई आक्साइड पाया  जाता है बाकी 0.97 प्रतिशत अन्य गैसे जैसे - हीलियम, आर्गन, नियान, क्रिटान, जेनान, आजोन एव जल वाष्प होता है वायु में गैसों की यही निश्चित मात्रा ही वायु को पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओ एव पेड़-पौधो के लिये जीवनदायनी होती है। वायु में गैसो के मात्रा का जरा भी अंतर स्वस्थ के लिये हानिकारक हो जाता है। अतः श्वसन के लिये आक्सीजन जरूरी होता है। जब कभी वायु में कार्बन डाई आक्साइड नाइट्रोजन के आक्साइडो की मात्रा में वृद्वि को ही  वायु प्रदूषण कहा जाता है।

जल प्रदूषण:

जल प्रदूषण, से अभिप्राय जल निकायों जैसे कि, झीलों, नदियों, समुद्रों और भूजल के पानी के संदूषित होने से है। किसी भी जल में किसी भी बाहरी पदार्थ की उपस्थिति जो किसी भी जल के स्वाभाविक गुण को परिवर्तित कर दे एवं स्वास्थ पशु पक्षी इत्यादि के लिये नुकसानदायक हो, जल प्रदूषण, कहलाता हैं। ऐसे जल निकाय पादपों और जीवों को प्रभावित करता है और सर्वदा यह प्रभाव न सिर्फ इन जीवों या पादपों के लिए अपितु संपूर्ण जैविक तंत्र के लिए विनाशकारी होता है।

ध्वनि प्रदुषणः 


ध्वनि प्रदूषण या अत्यधिक शोर किसी भी प्रकार के अनुपयोगी ध्वनियों को कहते हैं, जिससे मानव और जीव जन्तुओं को परेशानी होती है। इसमें यातायात के दौरान उत्पन्न होने वाला शोर मुख्य कारण है।





ऊष्मीय प्रदूषण: 
रेडियोधर्मी प्रदूषण ठोस, तरल या गैसीय पदार्थ में जहाँ अनायास या अवांछनीय रेडियोधर्मी पदार्थ की उपस्थिति होती है, उसे रेडियोधर्मी प्रदूषण कहते हैं। इसका प्रभाव पर्यावरण, जीव जन्तुओं और मनुष्यों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। जिससे लोगों की मृत्यु भी हो जाती है।

मिट्टी प्रदूषणः
 बड़े पैमाने पर हुए औद्योगीकरण एंव नगरीकरण ने नगरों में बढ़ती जनसंख्या एवं निकलने वाले द्रव एंव ठोस अवशिष्ट पदार्थ मिट्टी को प्रदूषित कर रहें हैं। ठोस कचरे के कारण आज भूमि में प्रदूषण अधिक फैल रहा है। ठोस कचरा प्रायरू घरों, मवेशी-गृहों, उद्योगों, कृषि एवं दूसरे स्थानों से भी आता है।

प्रकाश प्रदूषणः- 
प्रकाश प्रदूषण को दो मुख्य प्रकार में विभाजित किया जा सकता हैरू (1) कष्टप्रद प्रकाश जो अन्यथा प्राकृतिक या हल्की प्रकाश व्यवस्था में दखलंदाजी करता है और (2) अत्यधिक प्रकाश (आमतौर पर घर के भीतर) जो बेचैन करता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।


धीरे-धीरे विश्व की जनसँख्या बढती चहली जा रही है जिसके कारण वनों की कटाई भी जोरो से हो रही है। इन बीते 10-15 वर्षों में वनों की कटाई के कारण, पृथ्वी में कई प्रकार के खतरनाक गैसीय उत्सर्जन हुए हैं।
 




ज़िन्दगी है अजीब कहानी

अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है,
जिस चीज़ की चाह है वो ही बेगानी है,
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए,
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।


वृक्ष मित्र (सेल्फी वीथ ट्री) अभियान द्वारा वृक्षों के संरक्षण के प्रति लोगो में जागरूकता का प्रयास

पेड़ हमारे जीवन व मानव सभ्यता के प्रतीक हैं। पेड़ों के बिना धरती पर जीवन की कल्पना करना असंभव है। ये धरती मॉ के द्वारा हम मनुष्यों को दि...